गलतफेमिया! जी हां गलतफेमिया, मुझ को कभी यकीन ही नही था कि इस मनुष्य जीवन मे गलतफेमिया नाम के भी कोई अहसास होते है। परंतु आज लगभग उम्र के इस पड़ाव पर कई वर्षों के जीवन संघर्ष के फलस्वरूप मुझ को कुछ कुछ अहसास हो रहा है कि हा गलतफेमिया नाम के भी कोई बेहद संगीन अहसास हम मनुष्य के जीवन मे होते है
या यूं कहो तो कही ज्यादा उचित होगा कि आज तक जी रहा था मैं जिन दर्दो तकलीफों से जूझते हुए कुछ और नही नतीज़े थे वो दरमियाँ अपनों के अपनी ही गलतफेमियो के!

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

20/09/2018 at 09:19 am

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