Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

Poetry, Kavya, Shayari, Sings, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

September 30, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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अजन्मा भ्रूण। (एहसास)

एक एहसास-एक भाव।

नमस्कार प्रियजनों,

मैं विक्रांत राजलीवाल आप सब चाहने वालो को सूचित करना चाहता हु कि आप सभी महानुभवों के समक्ष प्रस्तुत करता हु मेरी प्रथम प्रकाशित समाजिक एव मानवता की भावना से प्रेरित मेरी प्रथम कविताओं की पुस्तक एहसास से मेरे द्वारा लिखित मेरी प्रथम कविता के रूप में एक दर्द भर किस्सा। जो आज भी कहि न कही सत्य का एक एहसास हम सब के सभ्य समाज को अत्यंत समीप से करवाते हुए उस सत्य से हम सबका एक कठोर परिचय उवलब्ध करवाता है जिसे शायद हम आज भी नकार नही सकते। इस सत्य को मेरी कविता के रूप में हर किसी पढ़ने वाले पाठक ने बेहद सरहाया और पसन्द किया, हालाँकि अभी तक मैं अपनी प्रथम प्रकाशित इस पुस्तक की केवल 350 प्रतियां ही कुछ जानने वालों के बीच वितरण कर सका हु।

अपनी इस अति संवेदनशील समाजिक एव मानवता के विषय की काव्य क़िस्सा को कुछ समय पूर्व मेने वीडियो में रिकॉर्ड किया था जो अभी तक केवल मेरे youtube अकाउंट के मेरे एक चैनल Vikrant Rajliwal -साहित्यकार- पर ही अपलोड थी। परंतु अब मेने विचार किया है कि सोशल नेटवर्किंग के विभिन्न मंचो पर भी मेरे साथ बहुत से काव्य कविता एव शायरी प्रेमी जुड़ गए है इसलिए अब यह अपना प्रथम दर्द, प्रथम कविता, एक किस्सा आप सभी प्रियजनों के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हु।

मित्रो यह केवल एक कविता ही नही है मित्रो यह एक एहसास हैं एक विरोध है उन समाजिक परम्पराओ एव कुरीतियों पर जो आज भी हमारे समाज मे कहि न कही अपनी विषैली जड़ें मजबूत किए हुए है। यह आवाज है उन मासूमो की जिन्हें जन्म से पहले ही मौत की नींद सुला दिया गया वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वह एक लड़की थी या उनका लिंग स्त्री लिंग था।

एक आशा करता हु कि आप मेरे इस दर्द को, इस भाव को समझ सके और इस प्रकार के कुविचारों और जघन्य अपराध के विरुद्ध अपने अपने तरीके से अपना अपना विरोध दर्ज कर उन मासूमो को एक भावपूर्ण श्रधांजलि और आने वाली पीढ़ियो को इस प्रकार के कुविचारों से मुक्ति प्रदान कर उन्हें शशक्त करे। एव अपने अपने स्तर पर इस प्रकार की विभिन्न कुरीतियों को अपने सभ्य समाज से नष्ट करने में अपना अपना अनमोल सहयोग प्रदान करेंगे।

🙏 बन कर अश्क़ नज़रो से गिर गईं जो बूंदे मेरे एहसास की,

अनमोल है वो दर्द, बिखर गया जो चीखती खामोशियो के साथ।

धन्यवाद।

अपना रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
Youtube video👉 https://youtu.be/QPY-iFqzJmg 💥🙏🙏🙏

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