Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Oct 2, 2018
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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बरबादियाँ।

हर बर्बादियों को बता अपनी अब क्या मैं नाम दु,
हर एक बरबादी भी कहा थी नसीब में जो मेरे।

हर दर्द ए जिंदगी जब खुद दवा बन जाती है न,
नासूर हर ज़ख्म और भी नासूर हो जाते है तब।।

जिंदगी जब जिंदगी से सरेराह डर जाती है न और मौत भी आइना हक़ीक़त का अक्स जब नजदीक से दिखाती है।

हर अहसास हक़ीक़त के ज़िन्दगी को डराते है जब,
लड़खड़ाते हर कदमों से साए जिंदगी के अंधेरो में खो जाते है तब।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
23/07/2018 at 11:00 am

FB_IMG_1521252529071 (Republish by Vikrant Rajliwal)

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