Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Oct 4, 2018
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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खंडित विशवास।

सत्य प्रेम से अगन ह्र्दय कि जवलित ज्वाला जो रंग इंद्रधनुषी स्थापित प्रेम गगन पर हुआ।

थाप विद्रोह से पीड़ित जो ह्र्दय ध्वनियां, प्रहार ह्र्दय पर विच्छेद जो ध्वनियां, थामे व्याकुल जो पंछी प्रेमी, उलझे सम्बन्धों से उनका फिर विच्छेद हुआ।।

करि ज्ञान से प्रेम परीक्षा धात ह्र्दय जो अटल प्रेम का,
खंडित विशवास दुखी स्वम् से फिर हमें जो रोष हुआ।

प्रेम सागर से तरंग ध्वनियां थामे जो अटूट प्रेम कि अकस्मात ही छिद्र भवँर का हलाहल फिर हमें जो प्राप्त हुआ।।

प्रेम दर्पण से अस्तित्व प्रेम का, छल जीवन में अकस्मात फिर स्थापित जो सत्य से हमारे हुआ।

सूखे नयन, पथराई सांसे, दया प्रेम से रुदन स्वम् का खंडित विशवास, अंधकार हर दिशा स्थापित फिर जो अकस्मात हुआ।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
29/07/2018 at 16:55 pm

Republish at vikrantrajliwal.comFB_IMG_1514904047730

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