FB_IMG_1520778305426एक दिन सासो पर पहरा कोई लग जाएगा।

हर दर्द-दिल, नज़दीक से चेहरा दिख जाएगा।।

भूल जाएगा, ज़माना-अनछुई यादो को जब।

बेगाना दफ़न तन्हाई में कही हो जाएगा तब।।

समझना ख्वाब कोई अंजना, नज़र तुमको न आए जब।

भूल जाना न करना याद, जान उसे कोई अफ़साना तब।।

करेगा फरियाद, दर्द ए ज़िंदगी है जो तेरा दीवाना।

तड़प ये ख़ामोशीया, तुम अब उसको भूल जाना।।

रूह मेरी, ज़िंदा है ज़िन्दगी, हर एक लम्हा कोई तन्हाई।

ये जिस्म, कफ़न है आरज़ू, हर एक लम्हा कोई रुसवाई।।

पंछी है महोबत का, वख्त ये बेदर्द बहुत हरजाई।

छूट गया, वो चला गया, अब ये मौसम, ये बेवफाई।।

कोई तमना, कोई आरज़ू अधूरी, बाकी न रहने पाए।

चाल है हर यक़ीन ये अहसास अपने, धड़कती धड़कने, बन्द सिने में कोई, अब बचने न पाए।।

कोई इक़रार, हर अहसास-अधूरा कोई निसान, बाकी न रहे जाए।

हाल है हर हक़ीक़त ये अहसास अपने, टूटा आईना, मतलबी यादे, अक्स कोई अधूरा , अब बचने न पाए।।

हर धड़कन, एक अहसास है, मतलबी कोई यादे वो अपनी
हर एक याद, उन धड़कनो को अपनी, अब तुम भूल जाना।

हर वादा, एक यकीं है, ज़िन्दगी का ज़िन्दगी से वो अपनी,
हर यकी, वो अहसास धड़कनो का, अब तुम भूल जाना।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish at vikrantrajliwal.com by Vikrant Rajliwal)

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