नशा है फ़िज़ाओं में आज, बहकी-बहकी सी सांसे, कुछ-कुछ मदहोश सी है।

साथी है साथ में आज, उफ़ान ए धड़कन, अंजाम ए हक़ीक़त, हैरानी सी है।।

रास्ते है साथ में आज, तलाश ए हौसले, मंजिले कुछ-कुछ अंजान सी है।

जशन है साथ माहौल में आज, निसान ए उदासी, अब भी मेरे साथ सी है।।

आरज़ू है साथ मे आज, अक्स ए जुदाई, पहेलु में खुशियां, धड़कने फिर भी हैरान सी है।

अल्फ़ाज़ है साथ रूह में आज, ख़ामोश ये जुबां, कत्ल ए एहसास, कलम मेरी दम तोड़ने को है।।

कलम है हाथ मे आज, नासूर ए जख़्म, खून ए श्याही, फड़कती हर एक नब्ज़, गुम सी है।

यक़ीन है साथ साए में आज, उदास ये लम्हे, इंतज़ार अब भी सांसोFB_IMG_1520872653315 में, हर साया साथ छोड़ने को हैं।।

विक्रान्त राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish at vijrantrajliwal.com)

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