Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Oct 14, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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एहसास…🕊

इस संसार की सीमा रेखा के उस ओर प्राम्भ होता है एक ओर नवीन संसार का एव उस नवीन संसार की सीमा रेखा के भी उस ओर पुनः प्रारम्भ होता है एक ओर नवीन संसार का!

यह चक्र इसी प्रकार से चलते हुए अनन्त काल को प्राप्त हो जाता है। एव इस दिव्य सफर के उस ओर प्राम्भ होता है पुनः एक ओर दिव्य सफर का यह चक्र भी इसी प्रकार से चलते हुए अनन्त काल को प्राप्त हो जाता है।

इस चक्र के अंत में सब कुछ इस साथ मुझ में ही मेरी अंतरात्मा में सम्लित हो कर एक साथ सहज ही समाय जाता है। सत्य है वो परम् परमात्मा जिसकी दिव्य ऊर्जा के दिव्य सकारात्मक प्रभाव के फलस्वरूप हम मनुष्यो समेत समस्त संसार एव इस सुंदर प्रकृति की उतपत्ति एक हम सब में जीवन प्राण का संचार हुआ है।

आज अंतर सिर्फ इतना ही है कि हम में से अधिकतम महानुभव व्यक्ति आज अपनी उस दिव्य ऊर्जा के उस दिव्य संचार का अपने जीवन से अज्ञानता एव अश्लील आधुनिकरण के कारण विस्मरण कर चुके है।

यहाँ मैं विक्रांत राजलीवाल आप सभी महानुभवों से यह जानना चाहता हु की आपको तो अपनी उस ईष्वरीय दिव्य ऊर्जा का एहसास है ना!!!आपको एहसास है ना…?

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Republish at vikrantrajliwal.com20181014_184159

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