FB_IMG_1539525295721नमस्कार मित्रों, मित्रता से तातपर्य केवल मित्र से है मित्र न तो वास्तविक होता और न ही छलिया होता है। वह न तो कोई व्यक्ति-विशेष होता है और न ही कोई जन साधारण ही होता है।
इस जीवन मे मित्र और उसकी मित्रता को जान पाना अत्यंत आवश्यक है। आपका मित्र कौन है? या आप किसे अपना मित्र मानते या जानते है? क्या वह कोई बाहरी व्यक्ति है या रक्त से संबंधित ?

प्रश्न # बाहरी व्यक्ति से आप क्या समझते है? और आपका अपना कौन है क्या यह जानते है आप? किसी भी साधारण और व्यक्ति विशेष के लिए यह जान पाना अत्यंत जटिल कार्य है।

मित्रो, इस जटिल विषय को जानने के लिए हर आध्यात्मिक महापुरुष को चाहे वह वर्तमान काल का हूँ या समय काल के किसी भी काल से सम्बंधित क्यों न हो। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन को इस असाधारण विषय को जानने एव समझने के लिए समर्पित किया है।

लेकिन क्या किसी भी ज्ञानी पुरुष को कभी भी इस जटिल एव दिलचस्प विषय के सही उत्तर का ज्ञात हो पाया है?

स्वतंत्र विचारक एक लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish after some modified by Vikrant Rajliwal at vikrantrajliwal.com)

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