Author, Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

October 17, 2018
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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अल्फ़ाज़ ए शायरी

🌹
टूटती सांसो से तन्हा धड़कने,
दम तोड़ती ख्वाहिशो से,
जिंदा है ज़िन्दगी।

🌹
लिखता हूं अहसास दिल से धड़कनो से अपने,
झलकते है रूह से जो कलम से मेरे।

🌹
दिख रही जो रौशनी एक दिन चिर कर अंधेरा सामने आ जाएगी ।

रोशन हो जाएगा यह जहां सारा, डूबती किश्ती भी किनारे लग जाएगी।।

🌹
दोस्ती दोस्तो कि जान लेती है।

हर वक़्त हर लम्हा एक इम्तेहान कोई लेती है।।

चिर के दिल धड़कनो से जज़्बात ए दोस्ती आँसुओ को छान देती है।।।

🌹
दिन के उजाले में दिखता नही, रांत कि कालिमा दिखा देती है अकसर अक्स अपना।

💦
दर्द ए ज़िन्दगी अब शायद आबाद हो जाए।
आए हो ज़िन्दगी में जो आप हमारे,
ज़ख्म ए दिल अब शायद मरहम पा जाए।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।20181017_164404.jpg

(Republish at vikrantrajliwal.com)

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