🌹 वो आए नज़दीक हमारे और हमसे टकरा गए, होश! अब भी नागवारा है जो हमे।

रुला देती है हेरानिया, वो गूंज! अब भी है कॉयम, जो सांसो में हमे।।

🌹 जुड़ते नही टूट कर दुबारा फिर से,
होते है नाज़ुक बहुत, रिश्ते ये सांसो के।

छूट भी जाए जिंदा जिस्म से चाहे हर सांस आख़री,
नही छूटते होते है मज़बूत बहुत, रिश्ते ये सांसो के।।
🌹 टुक टुक करती है जो घड़ी, रुक जाएगी एक दिन।
धुंधलाती हर तस्वीर ज़िन्दगी कि दिख जाएगी एक दिन।।
🌹 देखे है धोखे ज़िन्दगी में ज़िन्दगी से ज़िन्दगी के बेहिंतिया।
हर बढ़ते कदम से बढ़ते फासले, दरमियां अपनो के बेहिंतिया।।
💦 खफ़ा नही हु तुम से ए रूठे साए ज़िन्दगी के मेरे।
लगता है ख़ौफ़ बस जिंदा अहसासों से तेरे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish as a set at vikrantrajliwal.com by Vikrant RajliwalFB_IMG_1520777953054.jpg)

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