एक चीख सुनाई देती है आज भी अनजाने मुसाफ़िर मुझे।

ये रुकी सांसे ये ठहरी ज़िन्दगी ये एहसास ए जुदाई,
मेरे ख़ुद के नही।।

खो गए है जो एहसास न वो मेरे थे और कॉयम है जोFB_IMG_1528990311823.jpg
एहसास अभी टूटी धड़कनो में मेरे न ही ये मेरे है।

हम मिले के नही एक दूजे से एहसास बिछुड़ने से है यकीं,
न वो हमसे मीले थे और न ही हम उनसे कभी जो मिले थे।।

 विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish at vikrantrajliwal.com)

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