Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Oct 17, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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💦टूटता हौसला।

FB_IMG_1520873109502.jpgकभी कभी मनुष्य न चाहते हुये भी शक्तिहीन और विवश हो जाता है। जिसका अफ़सोस उसे उम्र भर सताता है।

वह न चाहते हुये भी अपनी उन तमाम इच्छाओं का खुद अपने ही हाथों दम घोट देता है जो उसके लिए उसकी ज़िन्दगी थी।

इसका तातपर्य यह भी निकलता है कि कभी-कभी मनुष्य न चाहते हुए भी खुद अपनी ज़िंदगी का अपने ही हाथों अंत करने पर विवश हो जाता है।

🌹 20180430_092400.jpgटूटना तो चाहा न था कभी। हौसला भी कुछ कम तो न था।

टूट गयी जो मीनार वो, चाहतो में कमी से किसी के,

लगा था खंज़र जब कमर पे मेरे, हाथ अपनों के निसान, वो पहेचान न पाया….

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish at vikrantrajliwal.com)

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