Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Oct 17, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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💦 भृष्ट व्यवस्था से रोटा गरीब।

 20181017_091946.pngआज जब भी अपनी नज़रो को उठा कर अपने आस पास के बदलते सामाजिक माहौल को देखता हूँ! तो एक असहनीय पीड़ा एक दुःखद हैरानी से आँखे फ़टी और धड़कने कुछ कटी कटी सी ज्ञान होती है।

आप सोच रहे होंगे ऐसा क्यों? तो मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि ऐसा क्यों न हो! जब भी कोई व्यक्ति भ्र्ष्टाचार की अग्नि में झुलसता हुआ और अपने भाग्य को कोसता दिखाई देता है।

और उस की उस असहनीय पीड़ा की अनदेखी कर कोई अपना ही उस की मजबूरी की पीड़ा से सुलगती हुए अग्नि से अपनी रोटी सेकता है तो वाक्य में इस निर्दयता से पूर्ण व्यवहार पर हैरानी की पीड़ा से आँखे फ़टी और धड़कने कुछ कटी सी ज्ञान होती है। और टूटे दिल से निकलती है एक आह!!! चाहे वो अपना अपने  ही देश का कोई  भृष्ट सरकारी बाबू हो या कोई भृष्ट नेता ?

👓 खा गया मेरे देश को, देश के गरीब को वो भृष्टाचरी बाबू, वो भृष्ट नेता।

उड़ाया है मख़ौल गरीब का, उसकी मजबूरी का,

कर के वादा झूठा, दिखाया था  जो सपना,

आया दर्पण में नजर सचाई के, था वो भृष्टाचरी

बाबू, वो नेता झूठा।

🇮🇳 15 अगस्त, स्वतन्त्रता दिवस, 26 जनवरी लोकतंत्र के पावन दिवस पर हम सब ईमानदारी का संकल्प धारण करते ही है पर आज से हमारे हर दिन, हर पल यही विचार  यही संकल्प हो जाए कि आज और अभी  हो जाए स्वाह विचार सब भृष्ट। चल पड़े काफ़िला, विकास का, हर मजबूर से गरीब से मिला, मजबूती से कदम से कदम।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish after minor typing error correction at vikrantrajliwal.com by Vikrant Rajliwal)

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