Author, Writer, Poet, Drama and Story Writer Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

October 18, 2018
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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💥 एक वास्तविक शिक्षा।

इस संसार में हर एक व्यक्ति अपने मानव जीवन मे शिक्षित होना चाहता है क्योंकि शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा हम अपने जीवन और समाज के हर वर्ग विशेष और हर स्तर के सामाजिक कार्यकलापों में एक सकारात्मक बदलाव उतपन्न कर सकते है। शिक्षा का प्रकार किताबी, व्यवहारिक या शारीरिक हो सकता है। परन्तु सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है कि हर प्रकार कि शिक्षा को प्राप्त करते समय विद्यार्थी को प्रत्येक क्षण मानसिक रूप से पूर्णता चेतन रहना अति आवश्यक होता है। यहाँ चेतना से तातपर्य है कि आपकी चेतना का स्तर किताबी, व्यवहारिक और सामाजिक तीनो स्तर पर अति महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि एक पूर्ण रूप से चेतन विद्यार्थी ही एक सशक्त और सभ्य समाज का निर्माण करने कि योग्यता रखते हुए अन्य व्यक्तियों एव विद्यार्थियों में भी वही योग्यता उतपन्न करने की एक क्षमता रखता है।

ऐसा क्यों? क्योंकि शिक्षा का महत्व केवल रोजगार तक ही सीमित नही होना चाहिए। शिक्षा प्राप्ति के उपरांत या शिक्षा प्राप्ति के दौरान ही हमे अपने जीवन के प्रत्येक क्षण इस विषय का एहसास एव महत्व होना अति आवश्यक है कि इस मानव जीवन में किताबी शिक्षा या रोजगार प्राप्ति के लिए प्राप्त शिक्षा से पूर्व अधिक महत्व इस विषय का होता है कि हमारे जीवन की सर्वप्रथम प्राथमिकता एक नेक और सच्चा इंसान बनने की होनी चाहिए न कि शिक्षा प्राप्ति के उपरांत हर मानवतापूर्ण भाव या व्यवहार को अनदेखा करते हुए केवल और केवल रोज़गार की प्राप्ति!

मित्रों ऐसा इसलिए है क्योंकि वास्तविक शिक्षा का स्तर केवल रोज़गार तक ही सीमित नही होता अपितु वास्तविक शिक्षा का वास्तविक स्तर एव उद्देश्य हर प्रकार कि कुरीतियो, कुविचारों एव शोषण के विरुद्ध विद्यार्थियों एव समाज के हर वर्ग विशेष को जागरूक करते हुए उनके अंत से होता है। इसके साथ ही बदलते समाज के परिवेश को एक सकारातमक नजरिया प्रदान करते हुए उन प्राचीन या जर्जर व्यवस्थाओं जिनके द्वारा हमारे सभ्य समाज का अभी तक पूर्ण रूप से विकास नही हो सका है और जिन व्यवस्थाओं के द्वारा हमारे सभ्य समाज मे व्याप्त हर प्रकार कि कुरीतियो एव शोषण का पूर्ण रूप से अंत नही हो सका है या जिनमे द्वारा यह क्षमता उतपन नही हो सकी है उनके स्थान पर एक मानवता और विकासात्मक से परिपूर्ण एक दृढ़ व्यवस्ता कि स्थापना से होता है।

आशा करता हु कि हमारे सभ्य समाज मे शीघ्र अतिशीघ्र ही हमारे देश कि वर्तमान एव भावी सरकारों द्वारा कोई मानवता और विकासात्मक से परिपूर्ण एक दृढ़ व्यवस्था का निर्माण कर उसे शीघ्रता से लागू करा जाए। जिसके द्वारा हमारे सभ्य समाज से हर प्रकार कि कुरीतियो, कुविचारों एव शोषण का पूर्ण रूप से अंत हो सके एव हर दिशा से सिर्फ और सिर्फ खुशहाली, उत्साह एव उमंग से पूर्ण स्वर हर प्रकार कि कुरीतियों, कंगाली एव शोषण को कुचलते हुए एक साथ एक स्वर से गूंज उठे।

जय हिंद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish at vikrantrajliwal.com)20180905_121737.jpg

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