Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Oct 19, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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💥 जय हनुमान।

जय हनुमन्त अति बलदाई।

जन्म जन्म के दुख मिटाई।।

देख तुन्हें हर दुष्ट है भागा।

मिट जाता है हर घाव ताजा।।

कौन है इस जग में तुमसा महान।

आते हो तुम ही दुखियो के काम।।

समीप ह्रदय है जवलित, तुम्हरा ही पवित्र उजाला।

अंधकार पल भर में मलिनता मन की दूर कर डाला।।

देख तुम्हे हर भक्त हरषाए।

तुम्हारे जैसा बनना हम चाहे।।

देह विशाल है कृपा जो तुम्हारी।

रोक दी है तुमने ही हर रात्रि काली।।

श्री राम: चंद्र है साथ तुम्हारे।

तुम हो विचित्र बेहद निराले।।

भक्ति का है पाठ पढ़ाया।

अज्ञानी का ज्ञान जगाया।।

ब्रह्मचारी हो बाल्य काल से, शक्ति श्री राम की है तुम्हारी।

पवन-पुत्र हो पावन चरित्र, लीला पवित्र पावन है तुम्हारी।।

दे हुंकार हर पापी तुमने ललकारा।

काम भी आगे तुम्हारे ठहर न पाया।

तुम हो मुझ को अत्यंत प्यारे।

समस्त जग से अत्यंत निराले।।

दुष्टो को पाठ नैकि का पढ़ाते हो।

मुक्ति उनसे इस जग को दिलाते हो।।

तुनमे दिखलाया उज्ज्वल उजाला सत्य का।

नाम से तुम्हारे मिटाया हर डर भुत-प्रेत का।।

रोगी भी निरोगी अब कहलाया।

लेकर नाम तुम्हारा अब हर्षाया।।

निर्बल को बल प्रदान करते हो।

भृमित का भृम हर लेते हो।।

अहंकारी का अहंकार खा जाते हो।

अहंकारी फिर भी नही कहलाते हो।।

तुममे ही है अति संयम एव बल।

कहा ठीक पाए फिर कपट एव छल।।

तुम्हारा है ओज-तेज़ निराला।

स्थापित है उसमें सत्य उजाला।।

तुमसा ये ओज-तेज़ कहा हम ला पाएँगे।

कृपा रहे जो हम पर तुम्हारी, कष्ट सब मिट जाएंगे।।

अज्ञानी को ज्ञान सिखाया।

अब वो भी ज्ञानी कहलाया।।

तुम ही हो गुरु ऐसे महान।

तुम से ही होते है सब काम।।

जय हो ब्रजरंग बलि।

दे दो अब मोक्ष गली।।

मिटा दो अज्ञान को खिल जाए व्यकुल मन की कली कली।

हर राह तुमसे ही है,जय हनुमन्ता, जय ब्रजरंगा, जय हो ब्रजरंग बलि।।

1539950513606.jpgविक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish at vikrantrajliwal.com)

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