Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Oct 20, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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सत्य-वचन।

सुबह सवेरे जाग के जल्दी, होता हैं आत्म-साक्षात्कार,
नयी सुबह नया सवेरा भरता हैं देह-प्राण।

सब से पहले नाम-ईशवर, नश्वर हैं बाकि ये संसार,
रग रग में जग जाए उमंग, करो न अब विचार।।

योग-प्रयाणं, धयान करो, ले कर प्रभु का नाम,
नयी सुबह, नया सवेरा भरता हैं देह-प्राण।

खुश-हाली के संस्कार हे ये, आत्म-शांति का ज्ञान,
माँत-पिता एक वो ही ईशवर, तुम लो अब उसको थाम।।

सचाई के मार्ग पे आगे, चलो हमेशा बढ़ते, राह-शूल हो या कंकर पथर या हो आग का दरिया।

कर लोंगे तुम पार भी उसको, पर न करना अभिमान।।

छोटे -बड़े सब लोगो का करना हमेशा सम्मान।।।

सुबह सवेरे जाग के जल्दी होता हैं आत्म-साक्षात्कार
नयी सुबह नया सवेरा भरता है देह प्राण।।

FB_IMG_1539701987370.jpgविक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish at vikrantrajliwal.com)

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