Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Oct 21, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

no comments

अंतिम ज्ञान।

FB_IMG_1534055668460.jpgयह अद्धभुत संसार, यह सुंदर प्रकृति हमारी, चाहती है एक बदलाव।

छुपा हुआ है सदियों से, हर कण-कण में यहाँ, कही न कही, कोई न कोई एक बदलाव।।

पहले बचपन, फिर जवानी, अंतिम रूप बुढापा, बदल जाता है यह देह भी हमारा।

बचपन की दुलार, जवानी की तकरार, फिर है बुढापा मोहताज, झेल कर सब सबक जिंदगी के,
चला जाता है, छोड़ कर नष्वर ये संसार, देह फिर हमारा।।

मौसम बदला, समा बदला, बदल गया ये समस्त संसार।

पहले था मौसम जहा सुहाना, अब है सिर्फ काली रात।।

रात भी काली ठहर न पाए, हो जाए जब आत्मसाक्षात्कार।

यही है अंतिम ज्ञान, चेतन है यह आत्मा हमारी, कर लो अब तुम यह ज्ञान।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish)

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: