Author, Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

October 25, 2018
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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❤ एक दर्द।

💦 दर्द ए दम जिंदगी से मिले जिंदगी को जितने भी, वो सब के सब सबक एक जिंदगी के बेदर्द से क्यों लगते है।

मौसम उजड़ गए बहार के महकती फिज़ाओ से जितने भी, वो सब के सब साथ एक तड़प के अब भी साथ मेरे तड़पते रहते है ।।

छोड़ कर चले गए जो नज़ारे जिंदगी के जितने भी अधूरे, वो सब के सब अब हिस्सा जिंदगी का क्यों लगते है।

टूट गईं जो सांसे गुज़रते हर लम्हो के साथ जितनी भी, वो सब की सब कसक एक धड़कनो के साथ अब भी मुझ में सिमट कर रहती है।।

रचनाकार एव कवि नज़्मकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish)FB_IMG_1516558324209

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