देख कर बदलते मौसम कि सुर्ख लाली, उफान हैं दबी-दबी धड़कनो में एक।

चेहरे पर है उनके नूर ए हुस्न का जलवा, मदहोश है जो निगाहे कोई आग उनमे एक।।

लाली से हैं लबो के जिनके, दिलकश ये मदहोश समा सारा, हसीन वो हसीना हसीनो में एक।

हाल ए दिल बेहाल हैं सुनाए जो उनको उनका वो दीवाना एक।।

दिल तोड़ दिया नज़रो को फेर के अपनी, हाल ए दिल सुनने से पहले उन्होंने जो एक।

कर रहा फरियाद, चोखट पर उनके रख कर सर अपना, हुस्न ए दीदार एक तम्मना आखरी, अब भी उनका वो दीवाना उनसे जो एक।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish)

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