Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Nov 8, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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🌹 प्रेम मिलन।

सांझ ढ़लते ही सितारे चमचमाए, निल गगन में दूर कही चाँद भी इतराए।

बहती पवन के झोखे से अंग प्रत्यंग सुगन्ध से बगिया के कण कण महक जाए।।

आओ सखी ए मेरी साथी, साथ साथ गीत प्रेम का बगिया गुलाब में अब कोई हम गुनगुनाए।

खिल जाए मुरझाई क्यारियां प्रत्येक, सुर कोई साजे ऐसा कि जग जीवन भी मुस्का जाए।।

न कोई गिला, न कोई शिकवा, बेठ प्रेम से आओ न नजदीक सखी एक दूजे से प्रेम गीत अब कोई हम दोहराए।

प्यासा ये मन तपन प्रेम से, भाव व्यवहार ये ह्रदय प्रेम का, आलिंगन एक दूजे से आत्मा का अब अपने हम लगाए।।

खिल जाए हर्ष ह्रदय ये मधुर संगीत से, चेतना जटिल ये जीवन की न अब हमे आने पाए।

अलिंगम ये प्रेम का प्रेम से, ह्रदय मेल आत्मा का आत्मा से अब हम एक हो जाए।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

( पुनः प्रकाशित एक शब्द टंकण त्रुटि सुधार उपरांत जो कि सातवी पन्ति एव आखरी से दूसरी पन्ति के प्रथम शब्द जो खिल के स्थान पर खो टंकण हो गया था)

(Republish at vikrantrajliwal.com)

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