नमस्कार मित्रों, आज मैं आप सभी से अपने कुछ एहसास साँझा करना चाहूंगा कि आज से लगभग डेढ़ से दो वर्ष पूर्व तक वर्ष 2016 अगस्त के अंत एव वर्ष 2016 सितम्बर के आरम्भ से पूर्व तक मैं विक्रांत राजलीवाल सोशल मीडिया एव किसी भी प्रकार की मोबाइल टेक्नोलॉजी से पूर्णतः अनभिज्ञ था या मैने स्वम् ही इनके उपयोग से एक दूरी बनाए हुई थी। मुझे नही पता था कि सोशल मीडिया, फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम या ब्लॉग साइट क्या होता है एव उसकी कार्य शक्ति किस प्रकार से कार्य करती है या इनका उपयोग कैसे किया जाता है?

अक्सर मैं यही सोचा करता था कि इस सभी सोशल मीडिया के महान मंचो पर कार्य करने वाले या ऑनलाइन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वाले समस्त व्यक्तिओ ने कोई खास तकनीकी कोर्स किया होगा या यह एक तकनीकी प्रोग्राम है जिसे कुछ खास किस्म के व्यक्ति ही इनका उपयोग करते है या फिर पता नही समाज के तमाम व्यक्ति जो भी किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म के इन महान मंचो का इस्तेमाल या उपयोग करते है वह वहा पर पर कार्य कैसे करते होंगे या कर पाते है और जो कुछ भी वह वहा करते है तो वह कैसे करते होंगे? क्या उन्होंने कोई खास तकनीकी ज्ञान अर्जित किया है या किया होगा?

अक्सर मैं सुनता था कि सोशल मीडिया के महान मंचो जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम या ब्लॉग्स साइट एक बेहद विशाल और असरदार मंच है यहाँ हर एक व्यक्ति अपनी बात, कला एव कार्य सम्पूर्ण संसार से सांझा कर सकता है और करते है। पर कैसे इस बात से मैं पूर्णतः अनभिग्य था।

फिर एक समय आया जब वर्ष 2016 अगस्त मैं मुझसे किसी ने कहा कि अब आपको सोशल मीडिया एव मोबाइल का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि इसी वर्ष जनवरी 2016 में आपकी अति अति संवेशनशील समाजिक एव मानवता की भावनाओं से प्रेरित कविताओं पुस्तक *एहसास* प्रकाशित हुई है। जिससे अब आपको एक लेखक एव कवि के तौर पर आपके समस्त परिचित जानने लगे है। एव उन्होंने मुझ से कहा कि शोशल मीडिया इतना विशाल प्लेटफार्म है कि आप वहा पर असीमित काव्य, नज़्म, एव साहित्य प्रेमियों तक तुरन्त अपने एहसास अपनी रचनाए पहुचा सकते है।

बस फिर क्या था उनकी यह एक बात मेरे ह्रदय को बेहद समीप से स्पर्श कर गई। जिसके उपरांत सर्वप्रथम मेरा सोशल मीडिया के जिस मंच से परिचय हुआ वह था वह फेसबुक था। और अपना पहला फेसबुक अकाउंट 2016 अगस्त के अंत में बनने के बाद और एक ही महीने मैं अपने उस फेसबुक अकाउंट के हेक होने एव उसके उपरांत 2 से 3 अकाउंट और खो देने के बाद मुझको एहसास हुआ कि सोशल मीडिया एव साइबर क्राइम क्या होता है।

एव आज 10/11/2018 को लगभग दो वर्ष एव दो महीने सोशल मीडिया पर बिताने के बाद मुझे समझ आया कि यह भी एक संसार है जिसे हम वास्तविक दुनिया के लोग ही संचालित करते है। एव ऑनलाइन दुनिया मे भी बेहद हलचल एव हर क्रिया की प्रतिक्रिया मिल जाती है।

एक सबसे अहम बात जो मेने महसूस करि वह यह है कि ऑनलाइन कार्य करते समय या रचना लिखते समय हमारा मानव ह्रदय कुछ अधिक ही भावुक हो जाता है एव हममे से अधिकतर व्यक्ति उसी भावुकता में कुछ गलती कर देते है जो देखते ही देखते हमारी सोच से भी अधिक विकराल रूप धारण कर लेती है। जैसे भावुकता वश किसी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक का पासवर्ड बता देना। या किसी की पोस्ट पर तुरंत प्रतिक्रिया दे देना, बिना उस पोस्ट के तथ्यों की वास्तविक सच्चाई को जाने।
ऐसी ही कुछ एक गलतियो के चलते कितने ही मासूम व्यक्तिओ ने स्वम् को न चाहते हुए भी कई बार संकटमय परिस्थितियों में महसूस किया है।

आज मै सोशल मीडिया पर अपने ब्लॉग साइट vikrantrajliwal.com पर लगभग सैकड़ों नज़्म, काव्य कविताए, ग़ज़ल, गीत, नाटक, व्यंग्य, विचार एव बहुत से सामाजिक राजनीतिक मनोवैज्ञानिक एव मानवता की भावनाओं से प्रेरित विस्तृत एव लघु लेख लिखने एव प्रकाशित करने के उपरांत अत्यधिक भावुकता का अनुभव करता हु। अंत में मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल आप सभी से इतना ही कहना चाहूंगा कि अगर हम ऑनलाइन कार्य करते समय, रचनाए लिखते एव प्रकाशित करते समय या किसी की पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते समय थोड़ा भी सचेत रहे तो सोशल मीडिया जैसा अद्भुत और महान मंच शायद ही कोई और हो।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

vikrantrajliwal.com

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