देखता है दीवाना हसीन ख्वाब कई,
हर ख्वाब है मासूम उसका।

जीता है तन्हा तन्हाई में एक इंतेज़ार से वो,
खो गया है सनम कहि जो बेपरवा उसका।।

निसान ए जुदाई सीने से अपने लगाए हुए।
हर धड़कन अपने मे राज कई जो छुपाए हुए।।

जिंदा है दीवाना जो अब एक आस लिए,
दर्द ए दिल जो अपनी एक तन्हाई के साथ।

हो जाएगा एक रोज़ दीदार ए यार ये एक आस उसको,
ए वक़्त मिल जाए उसको, बिछुड़े सनम का अपने साथ।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish)

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