Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Nov 10, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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🎻 गुलिस्तां

ख्वाबो में अब भी मेरे, एक चेहरा नज़र आता है।
उजाड़ है गुलिस्तां मेरा, फिर न जाने क्यों,
खिला वहाँ एक गुलाब नज़र आता है।।

जब भी देखता हूं आईना ए महोबत, चेहरा ए सनम,
न जाने क्यों नज़र उसमे आता है।

हकीकत कहु जा अफ़साना कोई, तन्हाई में हमेशा से वो,
बिछुड़ा सनम, याद बहुत आता है।।💞

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
(Republish at vikrantrajliwal.com)

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