दिल ये दीवाने का अब क्यों धड़कना नही चाहता।

ज़िन्दगी ये करीब से अब क्यों देखना नही चाहता।।

उदास मन ये बेजान सी धड़कने है क्यों, अब ये दिवाना जिंदगी को अपनी क्यों जीना नही चाहता।

हर लम्हा एक बेचैनी सी है क्यों, अब ये दिवाना उन्मुक्त उड़ान को अपनी क्यों उड़ना नही चाहता।।

नही जवाब अहसासों का जो अपने, क्यों ये दिवाना हर अहसास ए जिंदगी से अब कोई अहसास नही चाहता।

ख़त्म हर राह जो हर रास्ता है ना-उम्मीदी से घायल, हर राह उस रास्ते से अब ये दिवाना क्यों गुजरना नही चाहता।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक अहसास जो दर्द ए ज़िन्दगी से प्रेरित है।

(19/02/2018 at 17:39 pm

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