Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Nov 12, 2018
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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🕊 🌅 एहसास

इस संसार की सीमा रेखा के उस ओर प्रारम्भ होता है एक और नवीन संसार का एव उस नवीन संसार की सीमा रेखा के भी उस ओर पुनः प्रारम्भ होता है एक ओर नवीन संसार का!

यह चक्र इसी प्रकार से चलते हुए अनन्त काल को प्राप्त हो जाता है। एव इस दिव्य सफर के उस ओर प्राम्भ होता है पुनः एक और दिव्य सफर का यह चक्र भी इसी प्रकार से चलते हुए अनन्त काल को प्राप्त हो जाता है।

इस चक्र के अंत में सब कुछ एक साथ मुझ में ही (ईश्वरीय दिव्य ऊर्जा) मेरी अंतरात्मा में सम्लित हो कर एक साथ सहज ही समाय जाता है। सत्य है वो परम् परमात्मा जिसकी दिव्य ऊर्जा के दिव्य सकारात्मक प्रभाव के फलस्वरूप हम मनुष्यो समेत समस्त संसार एव इस सुंदर प्रकृति की उतपत्ति एव हम सब जीवित प्राणियों के भीतर में जीवन प्राण ऊर्जा का एक संचार हुआ है।

आज अंतर सिर्फ इतना ही है कि हम में से अधिकतम महानुभव व्यक्ति आज अपनी उस दिव्य ऊर्जा के उस दिव्य संचार का अपने जीवन से अज्ञानता एव अश्लील आधुनिकरण के कारण विस्मरण कर चुके है।

यहाँ मैं आपका अपना मित्र विक्रांत राजलीवाल आप सभी महानुभवों से यह जानना चाहता हु कि आपको तो अपनी उस ईष्वरीय दिव्य ऊर्जा का एहसास है ना!!!आपको एहसास है ना…?

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish)

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