Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Nov 13, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

no comments

🌹 सफर ए ज़िंदगानी (ग़ज़ल)

टूटते हर ख्वाबों से जिंदा है जो ख्वाब कई , रखा है उनको सलामत हमने कहि ।

हर सितम से टूटे दिल कि टूटी है धड़कन कई, रखा है उनको सलामत हमने कही।।

हर लम्हा जिनकी हिफाज़त हमने करि, कुछ बेरुखिया रुकी सी सांसे जो सलामत हममे कही।

हर रुके लम्हो से तड़पती, चाहते है दर्द कई , रुकी हर धड़कनो में सलामत हममे कहि।।

आए सैलाब जो जिंदगी में कभी, गए टूट जज्बातों से टकराकर हममे कहि।

बदला मौसम बदली फिजाएं, बदल गए हालात सब,
जिंदगी के जो न बदले, ज़ख्म जज्बात हममे कहि।।

नही मालूम ये सफर, ये जिंदगी के रास्ते, चलते चलते बदल गए जो मुकाम जिंदगी के रास्ते।

मंजिलो का पता पूछते पूछते बदल गए सफर जो मुसाफ़िर बदल गए जो रास्ते ।।

स्वतन्त्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Youtube video url 👉 https://youtu.be/tXEgs58hEng 💖

(Republish)

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: