FB_IMG_1534055766705सो जाओ ए जगमगाते सितारों।

खो जाओ ए झिलमिलाते नज़रो।।

सो गई है रात चांदनी भी अब कहि।

खो गए जो सपने बेरंग आसमां में कही।।

खो गयी हर आरज़ू जिंदा है तन्हाई बेजान दिल मे जो कहि,
जख़्म ए जिंदगी से तड़प ए दिल रुकी सांसो से बेजान दिल अब धड़कने न पाए।

हो गए जो खामोश हर शब्द लड़खड़ाई टूटी कलम जो कहि,
अहसास ए ज़िंदगी से फरियाद ए दिल टूटी धड़कनो से जख़्म ए दिल अब नासूर न हो जाए।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish)

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