Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Nov 14, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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💧 कशमकश जिंदगी।

20181005_182224.jpgदर्द जब हद से गुज़र जाए, कोई दवा भी काम न अपने आए,
ज़ख्म कुरेद लेते है तब अपने, प्याला ए ज़हर हलक से उड़ेल लेते है।

निशानी है दर्द ये तेरे इन्तेहाँ कि, जनून ए ज़िन्दगी ये सब तेरे उत्तर-चढ़ाव की,
हर इम्तेहां जान-ज़िन्दगी से खेलेगा तेरी, मुकदर ये सितम कशमकश साँसों में तेरी।

रचनाकार विक्रांत राजलिवाल द्वारा लिखित।

(Republish)

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