photocollage_201811157212823आओ मिल कर खेले हम खेल।

हर दिवस ही नित्य नए कोई खेल।।

तन भी हो उज्ज्वल ये मन भी हो उज्ज्वल।

ह्र्दय प्रत्येक भावना हो नैकि कि सिर्फ खेल।।

करना है नाम रौशन जो देश का, ऐसे हो निष्पक्ष अपने फिर ये खेल।।।

खेल खेल में बढ़ जाता है रिश्ता ये भाईचारे का एक।

खेल खेल में सुधर जाता है भाव ये भाईचारे का एक।।

आओ मिलकर खेले हम खेल।

हर दिवस हो नित्य नए कोई खेल।।

हर खेल का एक मंत्र जो, एक ही है उनका तंत्र जो,
जोश, उमंग और उत्साह से पूर्ण हो अपना हर खेल।

चमक जाएगा निखर जाएगा ओज तेज ये तुम्हारा,
दौड़ भाग और मानसिक रणनीति का है अपना हर खेल।।

आओ मिलकर खेले हम खेल।

हर दिवस ही नित्य नए कोई खेल।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

( दिल्ली विश्वविद्यालय फेकल्टी ऑफ लॉ के इस वर्ष 2018 के सालाना खेल उत्सव में लॉ के विद्यार्थियों के उत्साह वर्धन के लिए श्री विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित एक उत्साहवर्धक काव्य कविता।)
(Republish)

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