वृक्ष झुकता है बोझ से फलो के अपने, मिटाने को तृष्णा भूखे राहगीरों की अपने, विन्रम अपने स्वभाव से।

मनुष्य गुणी करवाता है परिचय आत्मस्वाभिमान से अपने, हर एक गुण का अवगुणों से अपने एक स्वाभिमान से।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
19/09/2018 at 19:47 pm

(Republish)

Advertisements

Leave a Reply