हर बुराई से बच कर चले जो मार्ग सच्चाई पर।
करे अनुभव शांति का वो मार्ग आत्मशांति पर।।

विकट हर परिस्थितियों से करे न जो कोई परहेज़।
थामे श्वासों से श्वासों का मेल, संस्कारो का यह खेल।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
18/09/2018 at 12:40 pm

(Republish)

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