Author, Writer, Poet, Drama and Story Writer Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

November 16, 2018
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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🇮🇳 लोकतंत्र एव मर्यादा।

जब भी कभी मैं किसी न्यूज़ चैनल या सोशल मीडिया के किसी भी मंच से यह सुनता या पढ़ता हूं कि एक चाय वाला भारत वर्ष का प्रधानमंत्री बन गया है या कोई भी देश के सम्मानित प्रधानमंत्री जी के लिए यह कहता है कि एक चाय वाला प्रधानमंत्री बन गया है तो यह सच है कि मुझे उन समस्त महानुभवों की ऐसी निम्न स्तरीय मानसिकता पर बेहद आचर्य होता है।

क्या यह सच है कि देश के प्रधानमंत्री जी ने अपनी चाय की दुकान से सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए पर्चा भरा था और उन्होंने अपनी चाय की दुकान से अपनी लोकतांत्रिक विजय के लिए प्रचार प्रसार किया था। एव वह केवल अपनी चाय की दुकान के बलबूते ही प्रधानमंत्री का चुनाव पूर्ण बहुमत से विजयी हो कर के लोकसभा गए थे?

तो यहाँ मैं उन सभी महानुभवों से इतना ही कहूंगा कि ऐसा हो भी सकता था और हो भी जाता तो भी उसमे देश के मजबूत लोकतंत्र की ही विजय होती। परन्तु माननीय प्रधानमंत्री के पूर्ण बहुमत के साथ एक ऐतिहासिक विजय के मामले में यह तथ्य की प्रधानमंत्री का चुनाव विजयी होने से पूर्व वह केवल और केवल एक चाय वाले ही थे पूर्णतः असत्य सिद्ध होता है। क्योंकि जेसा की मैने कहा कि अगर ऐसा होता भी तो वह भी इस देश के मजबूत लोकतंत की एक विजय ही होती परन्तु देश के माननीय प्रधानमंत्री जी अपने प्रधानमंत्री का चुनाव पूर्ण बहुमत से विजयी होने से पूर्व इसी देश के एक प्रतिष्ठित राज्य के मुख्यमंत्री थे न कि केवल और केवल चाय की दुकान चलाने वाले एक चायवाले थे। इसके साथ ही मैं यह भी कहना चाहता हु की क्या वह एक चाय की दुकान से सीधा इस देश के एक प्रतिष्ठित राज्य के मुख्यमंत्री बन गए थे? यहाँ मैं एक बार पुनः उन सभी महानुभवों से यह कहना चाहूंगा कि अगर ऐसा होता भी तो वह भी इस देश के मजबूत लोकतंत्र की एक विजय ही होती परन्तु माननीय प्रधानमंत्री जी के संदर्भ में यह तथ्य भी पूर्णतः सत्य सिद्ध नही होता। क्या उन्होंने अपनी चाय की दुकान से ही सीधे तौर पर इसी देश के एक प्रतिष्ठित राज्य के मुख्यमंत्री के चुनाव का पर्चा भरा था और क्या उस समय उन्होंने अपनी चाय की दुकान से ही अपना प्रचार प्रसार किया था यहाँ मैं आप सभी महानुभवों से पुनः यह कहना चाहूंगा कि अगर ऐसा हुआ भी होता तो भी वह इस देश के मजबूत लोकतंत्र की ही एक विजय होती परन्तु माननीय प्रधानमंत्री जी के संदर्भ में यह तथ्य सत्य सिद्ध नही होता क्योंकि वह मुख्यमंत्री बनने से पूर्व अपनी राजनितिक पार्टी में कई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।

फिर क्यों बार बार यह असत्य कहा जाता है कि एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बन गया। क्या सिर्फ माननीय प्रधानमंत्री जी पर एक व्यंग्य कसने के लिए या जो भी ऐसी निम्न स्तर की मानसिकता रखते है उन्हें ऐसा प्रतीत होता होगा कि शायद ऐसा बोलने से उनकी राजनीतिक पार्टी आगामी चुनाव विजयी हो जाएगी तो यहां मैं इतना ही कहना चाहूंगा ऐसी निन्म मानसिकता वाले व्यक्ति ऐसा कर के न केवल देश के माननीय प्रधानमंत्री जी का अपितु इस देश के गरीब का उनकी गरीबी का भी एक मख़ौल बनाने का प्रयास करते है।

क्योंकि अगर ऐसा हुआ होता कि एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री बन गया तो वह वर्ष, वह दिवस एव वह क्षण अपने आप मे एक ऐतिहासिक महत्व का हो जाता एव अगर भविष्य में कभी भी कोई योग्य उम्मीदवार प्रधानमंत्री बनने की योग्यता रखता हो चाहे फिर वह एक मामूली चाय वाला ही क्यों न हो उसे इस देश का मजबूत एव विश्वसनीय लोकतंत्र अवश्य देश का प्रधानमंत्री बनने का एक अवसर अवश्य प्रदान करेगा। क्योंकि अगर योग्यता हो तो एक चायवाला भी देश का प्रधानमंत्री बन सकता है यही तो हम सब के प्रिय लोकतंत्र की एक सबसे अहम और महान विशेषता है।

जय-हिंद।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। (एक स्वतन्त्र लेखक)

(मेरे इस लेख में अगर कहि तंकन में त्रुटी हो गई हो एव उस तंकन मे त्रुटि के कारण किसी भी व्यक्ति या संगठन को तनिक भर भी ठेस पहुची हो तो अपने ह्रदय से क्षमा प्राथी हु।)

16/11/2018 at 14:45 pm

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