Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Nov 17, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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एक हक़ीक़त।

रात चांदनी ये चमक सितारों सी कोई, झिलमिलाते ख़्वाब झिलमिलाती नज़रो में है जिंदा कई।IMG_20181005_181729_728.jpg

दम तोड़ती ये धड़कने दबा उफ़ान सा जिनमे कोई, ख़ामोश है जो नज़ारे अहसास यहाँ जिंदगी के कई।।

एक आरज़ू एक सलाम है आख़री, हर एक शख्स जिंदा है हर लम्हा जिंदगी, नकाब ये दर्द जो मरते हुए।

एक सकूँ एक अहसास है आखरी, हर एक अहसास साथ है हर लम्हा धड़कने, हक़ीक़त ये सकूं जो तड़पते हुए।।

स्वतँत्र लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

22/04/2018 at 23:07 pm
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(Republish)

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