Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतन्त्र लेखन-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित। -स्वतंत्र लेखन-

Nov 17, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal (स्वतँत्र लेखन)

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❤ अहसास।

कर गुस्ताखी ए दिल धड़कनो से कोई अपने,
हर धड़कन यहाँ साथ ज़िन्दगी से अब छूटने लगी है।

न देख मुड़ के दोबारा अक्स बिछुड़े को अपने,
ये वख्त ए श्याही यहाँ अब मिटने लगी है।।

न कर कोशिश हालात ये नसूर है अपने,
हर दवा ये ज़िन्दगी यहाँ अब बेमतलब से है।

कर ले नया फिर कोई समझौता बेगाने,
हर यक़ीन ए अहसास यहाँ आजमाए हुए है।।

रचनाकार एव लेखक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

Writer & Poet Vikrant Rajliwal’s blog sites creation’s

*Republish after some correction’s of typing errors at 17/11/2018 at 16:25 Pm*

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