अक्सर इस संसार में संसारी व्यक्ति एव रिश्ते बदलते मौसम के समान बदल जाते है। कभी वह आपको स्वम् के प्रति अत्यंत क्रूर एव कभी अत्यंत सौम्य प्रतीत हो सकते है। इसमें उनका कोई भी दोष नही यह सब बदलते मौसम का असर होता है साहब? मौसम! यह कोई बरसाती या प्राकृतिक मौसम नही है जो अपनी एक विशेष ऋतु के अनुसार ही परिवर्तित होता है। बल्कि यह मौसमी परिवर्तन कभी भी हो सकता है जिसका केंद्र बिंदु हमेशा एक ही होता है और यह परिवर्तन होता है आपके समाजिक एव आर्थिक स्थिति के अनुसार।

यहाँ स्वार्थ एव महत्वकांशा इस मौसमी परिवर्तन रूपी एहसास के अत्यंत महत्वपूर्ण अंग होते है। एव स्वम् को महान सिद्ध करने की एक भृमित भूख से पीड़ित व्यक्ति इस समूह के अति महत्वपूर्ण सदस्य होते है जो आपसी ताल मेल से अपने स्वार्थ की पूर्ति हेतु किसी भी सिमा तक स्वम् को मानवता की दृष्टि में नीचे गिरा सकते है एव अवसर मिलने पर अपने इस आपसी स्वार्थ की सिद्धि हेतु एक दूसरे पर प्रहार करने से तनिक भर भी नही हिचकिचाते।

इस प्रकार के स्वार्थी, निर्लज एव स्वम् को महान सिद्ध करने का एक प्रयास करने वाले, स्वम् में बदलते मौसम के समान स्वम् के स्वार्थी चरित्र, पारिवारिक एव समाजिक रिश्तों में एक क्रूर स्वार्थी परिवर्तन उतपन करने की एक क्षमता रखने वाले एव अपने उस क्रूर स्वार्थी परिवर्तन के फल स्वरूप उतपन अपने क्रूर स्वार्थी व्यवहार एव विचार से निर्दोष मासूमो का शोषण करने वाले समस्त दुर्जनो को यह ज्ञात हो जाए कि अति शीघ्र ही उनके हर कुकृतियों के लिए उन्हें ईष्वर के महा कोप का भागी बनने से स्वम् ईश्वर भी उन दुर्जनों की रक्षा अब नही कर सकता है।

एव जल्द ही इस संसार मे मौजूद समस्त दुर्जनो को जिनके कारण न जाने कितने निर्दोष मासूमो को अपनी एक बेबसी से पूर्ण सिसकती सिसकियों समेत किसी अंधियारी कब्र में एक गुमनामी एव बदनामी की नींद सुला दिया गया है एक सत्य एहसास अवश्य होगा कि इस बार मौसम फिर से स्वम् को बदलते हुए उनके साथ भी कब का स्करात्मकतापूर्वक परिवर्तित हो चुका है और उन जैसे समस्त दुर्जनो को उनकी आत्मा सहित सत्य अग्नि से ज्वलित सत्य एहसासों से उतपन इस सकारात्मक परिवर्तन के फलस्वरूप, सकारात्मक मौसमी परिवर्तन के साथ उनके हर कुकृत्यों के दंडस्वरूप एक अत्यंत भयंकर एव उनकी सोच से भी विपरीत दंड स्वरूप एक सत्य एहसास की दिव्य ज्वलित अग्नि से उन्हें दण्डित किया जा चुका है।

जिसके परिणाम स्वरूप उन दुर्जनों के शिकार हुए समस्त मासूमो को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी जो अब इस स्वार्थी संसार को छोड़ कर एक गहरी और अनन्त काल की चिर निंद्रा में सो चुके है या जिन्हें उस अनन्त काल की चिर निंद्रा में एक मौत की निंद्रा में एक गुमनामी के साथ सुला दिया गया है।

हे ईष्वर मैं विक्रांत राजलीवाल आज अपने समस्त पाठको एव उन दिव्य सच्चे मनुष्यों की उस दिव्य ऊर्जा के साथ जो चाहे इस संसार मे किसी भी कल में क्यों न जन्मे हो एव चाहे इस समय उनकी वह दिव्य ऊर्जा इस ब्रह्मांड में कही भी व्याप्त क्यों न हो मैं उन्हें साक्षी मान कर आपसे उन समस्त मासूमो को जो किसी भी काल मे किसी भी स्वरूप में किसी भी प्रकार के शोषण से शोषित हुए हो एव जिनकी दर्द भरी एक मदद की आवाज को हर सुनने एव जानने वाले व्यक्ति ने अनदेखा करते हुए उनके उस शोषण में किसी न किसी प्रकार से अपना क्रूर योगदान देते हुए उन्हें एक मौत एव उनकी मौत के कारण को एक गुमनामी की अंधियारी खाई में लुप्त कर दिया है एव भविष्य में ऐसे ही न्याय से वंचित उन समस्त मासूमो के लिये उनकी एव अपनी आत्मा की शांति के लिए आपसे प्रार्थना करता हु। कृपया हमें ऐसी आत्मशांति प्रदान करे जिससे हमें इस क्रूर संसार मे फिर से जन्म न लेना पड़े और हमारी आत्मा एक शांति का अनुभव प्राप्त कर सके।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित उनके निजी एहसास जो उनकी अति संवेशनशील भावनाओं से प्रेरित है।

17/11/2018 at 10:20Am

(एक बार पुनः प्रकाशित कर रहा हूँ कुछ एक तंकन मे त्रुटि सुधार उपरांत 11:57 am पर)

 

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