Writer & Poet Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari & Article's by Vikrant Rajliwal

Nov 18, 2018
Vikrant Rajliwal (विक्रांत राजलीवाल) -स्वतन्त्र लेखक-

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एक आह-एक उम्मीद।

FB_IMG_1534055749911उम्मीद है जल्द ही होगा उदय एक सूर्य नया इस ब्रह्मांड में फिर से कहि।

जला देगा हर अंधेरे को करने को स्थापित एक प्रकाश नया इस धरातल पर फिर से कहि।।

देख रहा है वक़्त भी खड़ा जो खामोशी से इंतजार में ओट ए धड़कनो की सच्चाई से अपनी कहि।

नाउम्मीदी हर एक आह है जो दिल की बेबस, जला न दे जुल्मी को किसी मजबूर की कहि।।

स्वतँत्र लेखक एव विचारक विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

25/03/2018 at 18:27 Pm

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(Republish)

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