FB_IMG_1530110354775.jpgये मासूम चेहरा, उस पर दर्द महोबत का अश्क़ ये चेहरे
पर जो कमसिन,
हाल ए दिल सुनाते है उसका ये सुनहरे निसान।

कर दिया कत्ल दीवाने का, ये दर्द नही असां, अब पोछ भी लो, अश्क़ ए महोबत के चेहरे से मासूम अपने,
बेदर्द ये सुनहरे निसान।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish)

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