Author, Writer, Poet, Drama and Story Writer Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

November 18, 2018
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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🕊 एहसास (एक संग्रह)

💦 IMG_20181021_075138_776.jpg राह ए ज़िंदगानी।

ज़िन्दगी है एक संघर्ष का नाम।
कभी है काफिला तो कभी तन्हाई का नाम।।

छूट जाते है सफ़र ए ज़िंदगानी में साथी कई।
मिल जाते है अंजाने फिर मुसाफ़िर नए कई।।

राह ए महोबत है उस खुदाई का नाम।
बन जाते है बिगड़े जहाँ अधूरे कई काम।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  एक यकीं।

कुचल दो हर एक बाधा विरोधी, विरोधी हर एक साए को।
बढ़ाओ कदम यकीं से आगे, कुचल दो मलिन हर मर्यादा को।।

जी सके तो जी लेगा तुम ज़िन्दगी, मर न जाना, टूट न जाना बीच रास्ते।
हा देख रही उमंग ए ज़िन्दगी, राह तेरी, सरेराह बाह अपनी जो पसारे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉 आईना ए हक़ीक़त।

रास्तो पर इस दुनिया के क्यों है परेशान।
भूल गया है स्वम् को क्या आज का मतलबी इंसान।।

देख कर मोड़ घुमावदार, बदल देता है क्यों रास्ता मंज़िलो का अपनी ए नासमझ इंसान।
देख रहा आईना वक़्त भी हक़ीक़त जिसमे अपनी, मिट गए क्या तेरे सब रूहानी एहसास।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  सद्विचार।

जला कर खुद को भी करता है रौशन जहां ये सारा।
भांति ज्वलित सूर्य के कर डाले दहन कुविचार सारे।।

जागृत हर मनुष्य ने करने को स्थापित, उज्जवल एक प्रकाश।
जागृत आत्मा से अपने करने को रौशन जहां ये सारा।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  कशमकश।

उलझ कर कशमकश ए ज़िन्दगी कांटो से नफरतों के न होना कभी लहूलुहान।
खिल उठेगा चमन ए महोबत, ए ज़िन्दगी हाथ ज़िन्दगी का ले अब थाम।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  सत्य कर्म।

दिया गुरु ने रण-क्षेत्र से एक ज्ञान संदेश प्यारा।
कर्म भूमि में कर्म करो, यही हैं सत्य का नारा।।

राम कहो या कहो रहीम, दिखलाई जो राह सत्य की , लेकर हाथो में अपने उन्होंने जो ज्ञान जोत।
करना पड़े को कर देना हा निसंकोच ही असत्य पर एक तुम गम्भीर चोट।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  अंजाने रास्ते।

उठते ही अक्सर हाथ मेरे, उस रब की दुआओ के वास्ते।
चलता हूं राह अंजान पर, राह ए नसीब एक अपना लिए हुए।।

दिखलाते है डर कोई अंजाना सा, ये साए जो जिंदगी के जो अंजाने।
दर्द ये सितम है जो, ये पथरीली से ये कटीली से ये अनजाने से ये जिंदगी के जो रास्ते।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  एक विद्यार्थी।

जीवन की धारा बहती है जो निर्मल सी,
विद्यार्थी हु मैं उस पाठशाला का।

दिखलाती है जो दर्पण सच्चाई का,
सब को नजदीक से।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  एक दर्द।

जल रहा समाज, झुलस रही भावना।
घायल पड़ा विशवास भी, झेल रहा वेदना।।

मायूस खड़ा जो देख रहा, राह विकास से अंजान।
पड़ गए है छाले पैरों तले, जीने की रही न अब चाह।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  उड़ान।

उड़ गया जो परिंदा अब वो आज़ाद है।
हर गम ए ज़िंदगानी से अब वो आज़ाद है।।

नापने को फिर कोई आसमां, अब वो आज़ाद है।
नई वादियां नया गुलशन अब है उसके, अब वो आज़ाद है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  प्रतिदिन प्राथना।

सुबह सवेरे प्रतिदिन ईष्वर का हम आओ ध्यान करे।
दिया है वरदान ये जीवन, खुशहाली की आओ उससे प्राथना करे।।

हर चिंता और वासना का कर त्याग, चलो अब उसका ध्यान करें।
जीवन है अनमोल ये हमारा, शांति से शांति की अब हम प्रार्थना करे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  आपसी सहयोग।

जरूरत है हर सांस को एक नई सांस की।
जरूरत है हर धड़कन को एक नए अहसास की।।

मुसाफ़िर है एक ही किश्ती के ए मेरे मांझी दोनों ही हम।
ये दरिया है जिंदगी नही कोई आग, जिसमे कि दुब जाएंगे हम या जल जाएंगे हम।।

करना है सफर साथ साथ, सफर है ये जो ज़िंदगानी।
आ जाओ साथ हमारे, तन्हा है बहुत ये जो ज़िंदगानी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  कर्म।

यह रात भी बित जाएगी, यह अंधकार भी छट जाएगा।
दिखेगा जल्द ही नया सवेरा, नया उजाला छा जाएगा।।

आवश्यकता ये दिप ज्ञान अब बुझने न पाए।
जोत उमंग श्वासों से अपने कम न अब होने पाए।।

रण छेत्र ये कर्म भूमि है हमारी, धरा ये ब्रह्मांड तमाम।
न कोई संगी न कोई साथी, कर्म से कर्म का है ये संज्ञान।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉 एक राह-एक उम्मीद।

एक उम्मीद ही थी पर्याप्त, तिनको कि डूबते को सहारे के लिए।
हालात ये सबक ए मुसाफ़िर, तिनका भी न मिले जब सहारे के लिए।।

आ जाओ के नही वीरान है आबाद ये राह ए हक़ीक़त कि जो।
हम भी है दर्द ए ज़िंदगानी ए मुसाफ़िर दर्द साथ अपने लिए जो।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  इंद्रधनुषी रंग।

अजब गजब है ये दुनिया सारी, रंगीन इसके नज़ारे है।
जितना देखोंगे तुम इनको, उतने जगमगाते यहाँ सितारे है।।

हो जाए जो हैरानी तुम को, तो दिल अपना यह थाम लेना।
इंद्रधनुषी रंग है इसके, लगते जो सबको प्यारे है।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  मजबूर।

देखता हूं आज उठाकर नज़रे जब चारो ओर अपने।
देता है दिखाई साया, झूठ का बेईमानी का हर ओर अपने।।

मजबूर है हर कोई इंसां यहाँ, आती नही नज़र कोई नेक राह।
कर के कत्ल ए जमीर इंसानियत का अपने, जी रहा है हर कोई आज यहाँ।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  एक आह।

उम्मीद है जल्द ही होगा उदय एक सूर्य नया, इस ब्रह्मांड में फिर से कहि।
जला देगा हर अंधकार करने को स्थापित एक प्रकाश नया, इस धरातल पर फिर से कहि।।

देख रहा है वक़्त भी खड़ा जो खामोशी से इंतज़ार में ओट ए धड़कनो की सच्चाई से अपनी कहि।
ना उम्मीदी हर एक आह है जो दिल की बेबस, जला न दे जुल्मी को किसी मज़लूम की कहि।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  एक विचार।

विष वृक्ष का जड़ों में जो अपने, कर दे नष्ट फ्लो को खुद जो अपने,
वृक्ष बेचारा फिर क्या करे।

भर दिया विष फ्लो में जो अपने, भूख प्यास ए वृक्ष राही की अब अपने,
तृष्णा जीवन की फिर कैसे मिटे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  आत्म चेतना।

लेता हूं हर युग मे अवतार, साथ धर्म का निभाने को।
आता हूं चिर हर बार अंधकार, साथ प्रकाश फैलाने को।।

अब भी हु मैं (ईष्वर-अलाह) बीच तुम्हारे, ज्ञान दिप जलाने को।
ढूंढो न बाहर तुम नश्वर जग-संसार में मुझ को, ह्र्दय बीच ही पाओंगे तुम अपने मुझ को।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  एक एहसास।

यू ही उठाई जो कलम के सोचा उतार दु कुछ एहसास ए हक़ीक़त, कोरे ये कागज़ रह न जाए कोरे ही कहि ये जो ज़िंदगानी के।

हुई जो आहत खुद एहसासों से जो अपने, धड़का ये दिल, छूट न जाए हाथो से कलम, रह न जाए कहि एहसास ये अधूरे एहसासों के।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  एक संकल्प। /A resolution.

उगता है सूर्य, एक प्रकाश के साथ।
लाता है उजाला हर दिवस,
एक नई उम्मीद के साथ।।

हर एक नई किरण, जीवन की आशा,
उत्तपन है श्वास देह से, एक पवित्र संकल्प
के साथ।
चेतना चरित्र की जागृत है जीवन,
यात्रा जीवन के अब भी जो
अपने साथ।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉 A resolution.

The sun rises, with a light.
Brings light every day, with a new hope..

Every new ray of hope, life’s hope, is the breath of breath, with a holy resolution.
Consciousness is the hope of the character, life is still of life which is with her..

Written by Author Vikrant Rajliwal.

👉  भोर।

उड़ जा री रात कालिमा, भोर भए मन हरषाए।
महक मिले मन के मोहे, उपवन भी इतराए।।

पंछी चले है उड़ गगन को, पंख अपने फैलाए।
उड़ जा री रात कालिमा, दिप जले ह्र्दय हरषाए।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

👉  राह ए ज़िंदगानी।

ज़िन्दगी कि राह पर बिछुड़ते है साथी कई।
हो जाते है जुदा खुद से, खो जाते है साए कई।।

इंसाफ कि पुकार से, सत्य की जमीं पर,
दिखते है बहरूपिये यहाँ मुखोटे कई।

जुल्म ओ सितम के निशान से, सिसकती यहाँ जिंदगी,
छुपाए है हर मुखोटे से यहाँ राज जुल्म के कई।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

पुनः प्रकाशित एव संग्रह के रूप में प्रथम बार।
18/11/2018 at 17:10 pm

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