Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Nov 19, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

no comments

💥 समाज, शिक्षा और मनोवैज्ञानिक आधार।

एक शिशु जब इस संसार मे जन्म लेता है तो उसका उसके परिवार में एक अत्यंत उत्साह के साथ स्वागत किया जाता है। इसके उपरांत उसके परिवार के समस्त सदस्य अपने अपने मानसिक स्तर के अनुसार उस अबोध बालक की बुद्धि एव व्यवहार को अपने ज्ञान एव शिक्षा के प्रभाव से प्रभाविक करते हुए उसको शिक्षित करने का एक प्रयास करते है।

एक समय के उपरांत उस अबोध बालक का उसके घर परिवार से अलग बाहर के संसार से एक परिचय होता है एव अपने परिवार के सदस्यों के अलावा भी वह कई अन्य जनो के सम्पर्क क्षेत्र में भी आ जाता है। जिसमे से कुछ जन समाजिक परवर्ती के एव उनमें से कुछ जन असमाजिक परवर्ती के भी हो सकते है। जो अपने अपने मानसिक स्तर के अनुसार उस अबोध बालक की बुद्धि एव व्यवहार को अपने अपने ज्ञान एव शिक्षा के प्रभाव से प्रभावित करते हुए उसको अपने मानसिक स्तर के अनुसार शिक्षित करने का एक प्रयास करते है।

इस प्रकार अब वह अबोध बालक अनेक प्रकार की मासिक स्थितियों का सामना करते हुए स्वम् की एक मानसिक स्थिति तैयार कर लेता है एव उसका अनुसरण करते हुए अनेक प्रकार के अपने जीवन अनुभवों से गुजरते हुए अनेक प्रकार के उतार चढ़ावों का सामना करते हुए समाज मे अपना स्वम् का एक स्थान सुनिचित करने का एक प्रयास करता है। कभी कभी यह प्रयास सकारात्मक हो सकता है एव कभी कभी वह प्रयास नकारात्मक भी हो सकता है।

संक्षेप में यहाँ मैं आप सभी महानुभवों से इतना ही कहना चाहूंगा कि जिन भी बालको का प्रयास सकारत्मक होता है उनके उस सकारात्मक प्रयास के पीछे छुपे हुए होते है उन समस्त सकारात्मक मानसिक स्तर के व्यक्तियों का एक वह प्रयास जिन्होंने उसको अपने सकारात्मक विचारों से प्रभाविक करते हुए उस अबोध बालक को एक उचित समाजिक ज्ञान एव व्यवहारों से उसका एक परिचय अत्यंत समीप से करवाया।

एव इसके विपरीत जिन भी बालको का प्रयास नकारात्मक या असमाजिक होता है तो उनके उस नकारात्मक प्रयास के पीछे छुपे हुए होते है उन समस्त असमाजिक परवर्तियों के व्यक्तिओ का एक वह प्रयास, जिनसे उस अबोध बालक का उसकी अबोधता वश एक परिचय हो गया था एव जिसके फलस्वरूप उन समस्त नकारात्मक या असमाजिक मानसिक स्तर के व्यक्तियों ने उस अबोध बालक को अपने नकारात्मक एव दुर्व्यवहारों से प्रभावित करते हुए उस अबोध बालक का अपने उन समस्त असमाजिक व्यवहारों एव विचारो से उसका एक परिचय अत्यंत समीप से करवाया।

उपरोक्त विषय का सार इतना ही है कि एक अबोध बालक एव उसकी मानसिक स्तर को समझ पाना इतना भी जटिल कार्य नही होता। बस आपमे उसके मानसिक स्तर को समझने का एक धैर्य होना एव अपने उस धैर्य द्वारा उसके हर सकारात्मक व्यवहार को और भी निखारने की एक क्षमता का होना अति आवश्यक होता है एव उस अबोध बालक के हर एक नकारात्मक एव असमाजिक व्यवहार एव विचारो में अपने प्रेम एव विशवास से एक सकारत्मक परिवर्तन करने की एक क्षमता का होना भी अति आवश्यक होता है।

और यह क्षमता उत्पन्न होती है आपसी प्रेम एव सही मार्गदर्शन के द्वारा किए गए हर नेक भाव एव व्यहार से। इसके विपरीत हमारे सभ्य समाज के 85% अभिभावक अपने उस अबोध बालक की बदलती समाजिक प्रवर्ति के वास्तविक कारण को समझने का कोई भी एक प्रयास न करते हुए उसके हर बदलते व्यवहारों का अपने अल्प ज्ञान से समझने एव सुलझने का प्रयास करते है। जिसमे अधिकतर अभिभावकों को असफलता का ही सामना करना पड़ता है। जिसके फलस्वरूप उस अबोध बालक की मानसिक स्थिति अब और भी अधिक विकट रूप धारण कर लेती है। जिसके फलस्वरूप कई अभिभावक अपनी हर प्रकार की समस्या के लिए उस अबोध बालक को ही दोषी सिद्ध करते हुए उसको अनेको अनेक प्रकार से दण्डित करने से भी नही चूकते। जिसके परिणामस्वरूप कई तनावग्रस्त बालक आत्महत्या तक करने के लिए विवश हो जाते है।

इसिलए एक अबोध बालक की मानसिक एक व्यवहारिक स्थिति को अत्यंत समीप से समझना अत्यंत आवश्यक होता है। एव एक सही ज्ञान एव मार्गदर्शन से आप हर प्रकार से अपने एव अपने सभ्य समाज के समस्त बालको के व्यवहारों एव विचारो में एक सकारत्मक परिवर्तन लाते हुए उनका एक उचित मार्गदर्शन से एक परिचय उपलब्ध करवा देते है। जिसके परिणामस्वरूप उनके हर प्रकार के नकारात्मक एव असामाजिक व्यवहारों को एक सकारात्मक एव सामाजिक व्यवहारों में परिवर्तित किया जा सकता है। क्यों कि आपके द्वारा अपनाए गए हर एक उचित ज्ञान एव प्रेम भाव के द्वारा धैर्य से किया गया आपका हर एक व्यवहार एव विचार आपके एव हम सब के सभ्य समाज के समस्त अबोध बालको के हर प्रकार के नकारात्मक एव असामाजिक व्यवहारों एव विचारो में एक सकारात्मक परिवर्तन उतपन्न करने की एक क्षमता रखता है।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
19/11/2018 at22:05FB_IMG_1534055766705

Leave a Reply

Required fields are marked *.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: