Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Nov 19, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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🔥 अहसास ए ज़िंदगानी।

जला दिए थे जो कभी, अश्कों के साए से अपने, पन्ने ज़िंदगानी के जो गुलाबी।

उड़ गए थे बन कहि जो धुआँ-धुआँ, फाड़ कर आ गए है वो बाहर, फिर से धड़कती धड़कने हमारी।।

मिट के भी मिट न पाए जो अक्षर, किताब ए ज़िंदगानी से हमारी।

आ गए है लौट कर फिर से कलम ए श्याही में नाप पैमाना वख्त का, ज़िंदगानीCollageMaker_20181026_085522327 में वो हमारी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(Republish)

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