Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Nov 20, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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💥 सत्य है।

कभी कभी इस संसार के लोग आपके मोन को आपकी कमजोरी या मानसिक बीमारी समझने की भूल करते हुए अपने तरीके से आपका इलाज शुरू कर देते है तदुपरांत जिन्होंने वास्तविक ज्ञान और परिस्थितियों को शुष्म रूप से समझा है वह और भी शून्य में जाते हुए मौन की एक और उच्च अवस्था को प्राप्त कर जाते है। एव हर प्रकार की यातनाओं को सहते हुए, एक उचित समय आने पर इस संसार को यह सिद्ध कर देते है कि उनकी वास्तविक बुद्धि एव ज्ञान का स्तर क्या है।

एव जिन्होंने केवल कोई नकाब धारण किया होता है उनका उन महानुभवों के उस प्रयास से उस इलाज से नकाब उतर जाता है एव वह टूट कर एक सामान्य जन के भांति अपना सम्पूर्ण जीवन व्यतीत कर अंत काल मे इस संसार से विदा हो जाते है।

यहाँ सार इतना ही है कि आपने अपने जीवन के शुरुआती काल शिशु काल से अब तक क्या अनुभव एव ज्ञान अर्जित किया है। एव आपने अपने उन अनुभवों एव ज्ञान का किस प्रकार से एक सद्पयोग किया है।

अगर आपको अपने हर सकारात्मक व्यवहारों एव उच्च विचारो पर पूर्णता विशवास है तो एक न एक दिन आपके उन व्यवहारों एव विचारो की शक्ति से यह सम्पूर्ण संसार प्रकाशमान हो जाएगा।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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