IMG_20181116_220616_766.jpgनगों से नंगे मिले नंगे होंगे सारे।
नगों को देख नंगे मुस्काए,
भृष्ट है नंगे जितने भी जो सारे।।

प्रकाश सत्य से सत्य का कर देगा नंगा, नगों को नग्न है नंगे जितने भी जो सारे।
न्याय सत्य से सत्य का कर देगा न्याय, नगों से पीड़ित है बेबस जितने भी जो सारे।।

नंगे ये नग्न है दलदली भर्ष्टाचार से शिक्षित, बेशर्म जितने भी नंगे जो सारे।
चलेगी लहर सच्चाई की तो मचेगी भगदड़ एक भयानक, खुलेगी पोल नग्नता से नगों की नंगे है समस्त भृष्टाचारी जितने भी जो सारे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
21/11/2018 at 08:47 am

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