Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Nov 21, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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💦 एहसास।

किसी को अपनी कोई भी राय जब तक न दें,
जब तक कि वह आपसे आपकी राय के लिए न कहे।

किसे के कहे वचन पर जब तक विशवास न करे, जब तक वह उसे पूरा न कर दे।

अपने विचार केवल एक पवित्र वातावरण में ही अन्य जनो से साँझा करे, अन्यथा आप अपने विचारों का महत्व समाप्त कर देंगे।

यह एहसास है साहब जिसे आप कुछ इस तरह से भी कहे सकते है कि…

❤रवांगी है बदलते मौसम की जो,
असर ये हालात कहि वही तो नही।

हर एतबार से खाए है जिसने भी धोखे जमाने के,
दस्तूर ए वफ़ा की बाते अब वो भूल से भी नही करते।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
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