नही रहा कुछ भी कहने को ए साथी पास में अब जो मेरे।

नही बच पाए अल्फ़ाज़ अहसासों में ए साथी कोई पास में अब जो मेरे।।

ख़्वाहिश हर आरज़ू मेरी, अब भी है लहूलुहान सी कहि ए साथी पास में अब भी जो मेरे।

सांसे ये धड़कने है इल्ज़ाम कोई, तड़प हर सांस से दर्द कोई ए साथी पास में अब भी जो मेरे।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

22/11/2018 at17:27 FB_IMG_1530110230216.jpg

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