सुधार के मार्ग पर हम प्रत्येक क्षण अपने कमजोर या विचलित होते एहसासों एव भृमित मानसिकता से उतपन भृमित विचारो का सामना करते हुए जीत के एक कदम और समीप पहुच जाते है या फिर हम अपना मार्ग बदलते हुए अपने असंगत एव असमाजिक एडिक्शन को पुनः थाम सकते है।

यहाँ से हमे ज्ञात होते है दो मार्ग और दोनों का आरम्भ एक साथ ही होता है परंतु दोनों की दिशा कदापि एक समान नही होती है।

सुधार के मार्ग पर इस दोराहा से हर एक सुधार के मार्ग के राही का सामना होना सुनिचित होता है। और इस दोराहे का आरम्भ होता है एक आकर्षण से।

जी हा आकर्षण से! सर्वप्रथम हम आकर्षित होते है अपने उस असमाजिक एडिक्शन के प्रति जिसका हम कभी सेवन करते हुए भृमित रहते थे एव उस आकर्षण के कारण यहाँ से कुछ राही जिन पर ईष्वर कि आपकी उच्च शक्ति कि एक असीम कृपा बरसती है वह अपनाते है सत्य राह को एव वह सत्य कर्मो एव सत्यविचारो कि शक्ति से अपने उस विनाशमय आकर्षण का सामना करते हुए विजय के एक कदम और समीप पहुच जाते है।

एव दूसरे वह राही होते है जिन पर ईश्वर की कृपा नही बरसती या जो राही असयमीत हो अपनी भृमित मानसिकता के वशीभूत हो कर अपने कमजोर आत्मविश्वास के समक्ष झुक कर एक समझौता कर लेते है और वह अपनी कमजोर मानसिकता एव भृमित सोच के कारण पुनः अपने असमाजिक एडिक्शन को अज्ञान वश अपना लेते है।

यहाँ हमने दो मार्ग एव दो प्रकार के राही के विषय मे जाना जिनका उद्गम स्थान एक ही दिशा से निकलता है और वह दिशा है आकर्षण एव समर्पण। परन्तु आपको यह ज्ञात रहे कि इन दोनों मार्गो के परिणाम भी दो प्रकार के होते है जैसे…

प्रथम वह राही जिन पर उनके ससँगत कर्मों के फलस्वरूप ईश्वर कि कृपा बरसती है एक जो अपने सत्यकर्मो की शक्ति से सामना करते है अपने हर प्रकार के एडिक्शन से उतपन भृमित आकर्षण का, जिसके फल स्वरूप उनके समुख होते है पुनः दो मार्ग।

1) प्रथम होता है जीत का मार्ग जो उनको उचित व्यवहारिक ज्ञान एव उचित सानिध्य से सहज ही प्राप्त हो जाती है एव उनको सुधार के मार्ग पर एक कदम और आगे की ओर बढ़ाते हुए उनकी विजय सुनिचित करता है।

2) एव दूसरा होता है उचित सानिध्य के अभाव के कारण हर विकट परिस्थितियों में अपने सत्यकर्मो एव अपने ईश्वर की शक्ति पर विशवास करते हुए एक उचित सानिध्य एव एक असल विजेता के समुख अपनी कमजोर मानसिकता को स्वीकार करते हुए उनके मार्गदर्शन से स्वम् को अपने एडिक्शन से उतपन भृमित आकर्षण से बचाते हुए जीत के एक कदम ओर आगे को बढ़ जाना।

👉 इसके विपरित दूसरे प्रकार के वह राही होते है जो सुधार के मार्ग पर चलते हुए भी अपने हर प्रकार के असमाजिक एडिक्शन के आकर्षण की ओर न चाहते हुए भी, एक उचित सानिध्य के अभाव से, वह न चाहते हुए भी अपने एक गलत कदम के कारण पुनः अपने असंगत एव असमाजिक एडिक्शन की ग्रस्त में आ जाते है जिसके फलस्वरूप उन पर उनके ईष्वर कि शक्ति की कृपा नही बरसती और वह पुनः एक ऐसे जंजाल में फस जाते है यहाँ उनको मिलता है दर्द और सिर्फ दर्द! दर्द टूटते एहसासों से टूटते रिश्तों का, दर्द एक अनजाने डर का, दर्द जो उनको उनके उस एक गलत कदम के कारण प्राप्त होता है जिससे वह बच सकते थे केवल और केवल उचित व्यवहारिक ज्ञान एव एक ससँगत सानिध्य से प्राप्त एक दिव्य ज्ञान एव प्रयोग से, वह बच सकते थे एक उचित सानिध्य से प्राप्त एक सही मार्गदर्शन के फलस्वरूप एक उचित कदम से।

👉 यहाँ से उनके समुख भी होते है दो मार्ग!

1) प्रथम जो उनको पुनः एक उचित सानिध्य कि प्राप्ति से सत्यकर्मो की ओर अग्रसर करते हुए पुनः सुधार के मार्ग की ओर प्रशिक्षित करता है। एक उनका दर्द मिटाते हुए उन्हें एक कदम और जीत कि ओर बढ़ाते हुए हमें एक आत्मशांति का अनुभव प्रदान करता है।

2) एव दूसरा होता है वह कदम जो एक उचित सानिध्य के अभाव के फलस्वरूप अपने आप को अपने असंगत एव असमाजिक एडिक्शन कि ओर एक कदम और आगे को बढ़ाते हुए हमारा एक अनन्त एव अनिचित काल तक दर्द से परिचय करवा देता है। जहाँ दुख, गरीबी, बीमारी एव मानसिक परेशानी न केवल उनका अपितु उनके अपनो का जीवन भी बर्बाद करते हुए नरक से भी बतर बना देती है।

इसीलिए सुधार के मार्ग पर उचित सानिध्य की प्राप्ति एव उचित ज्ञान एव उचिर अनुभव अति आवश्यक होता है क्योंकि विजय का मार्ग (आत्मशांति का मार्ग) उचित सानिध्यता से और भी दृढ़ होता है और यह उचित सानिध्य हमे प्राप्त होता है सभ्य एव ज्ञानीजनों के समक्ष एक आत्मसमर्पण से, उनके साथ बैठकों में एक उचित एव दिवद वातावरण में उनके अनुभवों से ज्ञान अर्जित करते हुए एक आत्मशांति का एक दिवद अनुभव प्राप्त करते हुए एव अपने जैसे अन्य सुधार के राही के इर्द गिर्द। जो हमे उचित समय पर उचित मार्गदर्शन उवलब्ध करवाते हुए हमें अपने हर प्रकार के असंगत एव असमाजिक एडिक्शन के मनमोहक परन्तु खतरनाक जहरीले आकर्षण से सुरक्षा प्रदान करते हुए हमे विजय के एक कदम और समीप पहुचा देते है।

धन्यवाद।

रचनाकार, लेखक, एव विचार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।,(रिकवरी एडिक्ट at जीवन)

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