देखा जब भी सरेराह ख़ामोश नज़रो को उठा कर दीवाने ने अपनी जो उन्हें,

कर दिया वॉर धड़कते दिल पर, नज़रो को खामोशी से झुका कर हर बार उन्होंने जो मेरे।

इश्क़CollageMaker_20181029_123429896 नही हमसे, ये महोबत भी लगती है जो खिलवाड़ उन्हें,

दर्द ए दिल दे कर सरेराह चल दिए है जो हमे, अब भी मुस्कुराकर।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(पुनः प्रकाशित)

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