FB_IMG_1535948190951.jpgखुशनसीब होते है वो राह ए मुसाफ़िर, सफर ए ज़िंदगानी में साथ संघर्ष हर कदम है जिनके ए साथी।

हर एक सवेरा लाता है एक नई रौशनी, लिपटी अहसासों से चिंगारी कोई बेदर्द जो साथ अपने ए साथी।।

चक्रव्यूह नही अभिमन्यू सा, तोड़ न सके जिसे कोई, समाया विशवास सांसो में तेरे ए साथी।

तीर है अर्जुन सा भेद लक्ष्य निकल जाएगा, साथ न हो कोई चाहे तेरे, तन्हा तू चल ए साथी।।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
(पुनः प्रकाशित)

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