Author, Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

December 3, 2018
Author, Writer, Poet And Dramatist Vikrant Rajliwal

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💥 सत्य एक सांस्कृतिक विशवास।

अक्सर मैं प्राचीन वैदिककालीन इतिहास के सम्बंध में पढ़ता हूं कि आर्य जो हिन्दू धर्म से सम्बंधित एक महत्वपूर्ण वर्ग है यूरोप से आए थे?

परन्तु मैं अपने भारतवर्ष के अपने हिन्दू धर्म एव देवी देवताओँ, पुराणों, वेदों एव संस्कृति पर विश्वाश रखते हुए यह मानता हूं कि हा हो सकता है कि आर्य यूरोप में भी निवास करते है या आर्य वहा की एक प्राचीन शाशक वर्ग हो।

परन्तु इसका तदपि यह तातपर्य नही निकलता की आर्य यूरोप से भारतवर्ष में आए थे इस तथ्य की संभावना अति शुष्म होते हुए न के बराबर प्रतीत होती है। इसके विपरीत आर्य भारत वर्ष से यूरोप की ओर गए थे इस तथ्य की संभावनाएं अत्यधिक है। यह बात मैं यू ही नही कह रहा मित्रों इसके पीछे भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है जब सम्पूर्ण यूरोप पाषाण युग मे एक आदिम जनजाति के समान जीवन व्यतीत कर रहा था उस समय भारत अपने स्वर्णिम युग के एक स्वर्णिम दौर से गुजर रहा था।

एव यह भी हो सकता है कि जिस समय जिसने भी यह तथ्य दिए उस समय भारतवर्ष गुलामी की जंजीरों से जकड़ा हुआ एक बेबस देश था एव उन तथ्य के जरिए भारतवर्ष की सांस्कृतिक मान्यताओ एव विश्वाश को तोड़ते हुए भारतवर्ष की संस्कृति को मिटाने की एक साजिश या नकारात्मक कोशिश भी हो सकती है!

उपरोक्त विचार मेरे स्वम् के निजी विचार है जो मेरे हिन्दू धर्म एव भारतवर्ष की पुराणिक सांस्कृतिक मान्यताओं से प्रेरित है।

धन्यवाद।

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।
3/12/2018 at 21:20 pmFB_IMG_1536414617181

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