Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's -स्वतंत्र लेखक-

काव्य-नज़्म, ग़ज़ल-गीत, व्यंग्य-किस्से, नाटक-कहानी-विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।-स्वतंत्र लेखक-

Dec 6, 2018
Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal -स्वतंत्र लेखक-

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👺 बेदर्द ज़माना।

20181124_120423चले जाते है यार मेरे अक्सर बीच मझदार छोड़ कर।

देखता हूं राह मैं उनकी फिर काम सारे छोड़ कर।।

आते नही दुबारा से वो, फिर दिखते नही दोबारा से वो।

खड़ा हूँ अब भी राह पर वही, देख रहा हु रास्ता उनका, मगर दिखते नही फिर कहि वो।।

क्या ये ही जिंदगी है एक ख्वाब मेरा टूटा एतबार जो पुराना,
देख रहा हु जो एक ज़माने से वही पर अब भी मैं जो।।।

सितमगर हज़ारो मिले बेदर्द इस ज़माने में।

तोड़ा है दिल ए दीवाना यहाँ हर किसी ने।।

लगते है तन्हाई में इल्जाम कई संगीन, हो जाता है मजबूर दीवाना।

दिखता नही तड़पते साए से अपने, जब भी कोई खोया साथी पुराना।।

दिख तो जाते है चेहरे वही, पर दिखता नही उनमे वो उनका अक्स पुराना।।।

रचनाकार विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

(06/12/2018 at 21:05pm)

(पुनः प्रकाशित)

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