Writer, Poet & Dramatist Vikrant Rajliwal Creation's

Poetry, Shayari, Gazal, Satire, drama & Articles Written by Vikrant Rajliwal

December 9, 2018
Kavi, Shayar & Natakakar Vikrant Rajliwal Creation's

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💥 रिकवरी आपका जन्म-सिद्ध अधिकार।

रिकवरी जिसके की आप वास्तव मे अधिकारी है। रिकवरी अपने सकरात्मक कर्मो एव पवित्र प्रार्थनाओं के द्वारा उन भाव-व्यवहारों की, उन अधिकारों की, उन मान सम्मान एव वस्तुओँ की, जिसे आपके व्यसनों *एडिक्शन* ने आपको भृमित कर आपसे कोसो दूर करते हुए आपको एक अनन्तकालीं दरिद्रता में धकेल दिया था।

दरिद्रता नेक भाव-व्यवहारो की, दरिद्रता अपने व्यसनों से दूर एक स्वतंत्र एव उन्मुक्त जीवन को जीने की, दरिद्रता स्वम् को स्वीकार न कर सकने की। इन सभी प्रकार की दरिद्रता को मिटाते हुए स्वम् के वास्तविक व्यक्तिव को स्वीकारते हुए। प्रतिदिन नेक भाव-व्यवहारों से पूर्व जीवन व्यतीत करते हुए एव अपने इष्ट से अपने एव उन सभी भृमित व्यसनियों के लिए जो आज भी किसी न किसी प्रकार के व्यसन की गिरफ्त में अपना अनमोल जीवन बर्बाद करते हुए किसी प्रकार से सिर्फ व्यतीत किए जा रहे है। अपनी एव उनकी आत्मशांति के लिए अपने ह्रदय स्वरूप अपनी अंतरात्मा से प्रार्थना करते हुए आप अपने जीवन स्वरूप अपनी एक अनन्तकालीं रिकवरी को प्रतिदिन जीते हुए प्राप्त कर सकते है।
इसके लिए आपको एक उचित मार्गदर्शन एव वास्तविक अनुभवशाली एक ऐसे व्यवक्त्वि की आवश्यकता होती है जो आपको अपने वास्तविक अनुभव एव ज्ञान के द्वारा आपको आपके हर एक बढ़ते कदम से एक उचित सकारात्मक वातावरण प्रदान करने की एक क्षमता सहेज ही उपलब्ध करवा सके।

शेष अगले क्रम से…

विक्रांत राजलीवाल द्वारा लिखित।

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